हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज, फिर भी फरार बताया जा रहा कांकेर का कथित सट्टा किंग मनीष आसरानी
22 Jul 2026 • Admin • 👁 8,610 Views
ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क पर पुलिस की कार्रवाई के बीच आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने पर उठे सवाल
कांकेर/रायपुर। छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ जारी कार्रवाई के बीच कांकेर निवासी मनीष आसरानी को लेकर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। रायपुर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 561/2024 के मामले में उसकी अग्रिम जमानत याचिका छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर द्वारा खारिज किए जाने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
बताया जा रहा है कि पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी फरार है। वहीं, सूत्रों के अनुसार वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा है और ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े विभिन्न पैनलों के संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पुलिस के अनुसार, मामले में गिरफ्तार सह-आरोपी अरुण कुमार यादव से पूछताछ के दौरान मनीष आसरानी का नाम सामने आया था। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया।
स्थानीय स्तर पर संरक्षण के आरोप
मनीष आसरानी को लेकर स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि उसके कथित नेटवर्क से जुड़े लोग अब भी ऑनलाइन सट्टेबाजी का संचालन कर रहे हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि मांझापारा और आसपास के क्षेत्रों में संचालित कथित सट्टा नेटवर्क की जानकारी स्थानीय पुलिस को होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस प्रशासन की ओर से संरक्षण के आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ऑनलाइन सट्टेबाजी से युवाओं के प्रभावित होने का दावा
स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, ऑनलाइन सट्टेबाजी के बढ़ते नेटवर्क का असर युवाओं पर पड़ रहा है। कई युवाओं के कर्ज में डूबने और आर्थिक नुकसान उठाने की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि, ऐसे मामलों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ पुलिस को लगातार अभियान चलाकर ऐसे नेटवर्क से जुड़े लोगों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
पुलिस का बयान
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ऑनलाइन सट्टेबाजी और अवैध जुआ नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई जारी है। सिविल लाइंस रायपुर में दर्ज मामले में मुख्य आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है और उसकी गिरफ्तारी के लिए तकनीकी सर्विलांस सहित अन्य माध्यमों से प्रयास किए जा रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा आरोपी को संरक्षण देने या पुलिस कार्रवाई से जुड़ी जानकारी लीक करने की बात सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बताया जा रहा है कि पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी फरार है। वहीं, सूत्रों के अनुसार वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा है और ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े विभिन्न पैनलों के संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पुलिस के अनुसार, मामले में गिरफ्तार सह-आरोपी अरुण कुमार यादव से पूछताछ के दौरान मनीष आसरानी का नाम सामने आया था। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया।
स्थानीय स्तर पर संरक्षण के आरोप
मनीष आसरानी को लेकर स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि उसके कथित नेटवर्क से जुड़े लोग अब भी ऑनलाइन सट्टेबाजी का संचालन कर रहे हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि मांझापारा और आसपास के क्षेत्रों में संचालित कथित सट्टा नेटवर्क की जानकारी स्थानीय पुलिस को होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस प्रशासन की ओर से संरक्षण के आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ऑनलाइन सट्टेबाजी से युवाओं के प्रभावित होने का दावा
स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, ऑनलाइन सट्टेबाजी के बढ़ते नेटवर्क का असर युवाओं पर पड़ रहा है। कई युवाओं के कर्ज में डूबने और आर्थिक नुकसान उठाने की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि, ऐसे मामलों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ पुलिस को लगातार अभियान चलाकर ऐसे नेटवर्क से जुड़े लोगों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
पुलिस का बयान
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ऑनलाइन सट्टेबाजी और अवैध जुआ नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई जारी है। सिविल लाइंस रायपुर में दर्ज मामले में मुख्य आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है और उसकी गिरफ्तारी के लिए तकनीकी सर्विलांस सहित अन्य माध्यमों से प्रयास किए जा रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा आरोपी को संरक्षण देने या पुलिस कार्रवाई से जुड़ी जानकारी लीक करने की बात सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।