|| 21 वर्षों बाद गूंजा शंखनाद: केरलापेंदा राम मंदिर में हुआ ऐतिहासिक हवन-पूजन, दीपिका शोरी ने दी आहुति ||
23 Jul 2026 • Admin • 👁 8,536 Views
सुकमा:-धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में आस्था की लौ एक बार फिर प्रज्वलित हो उठी है।
जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर, चिंतलनार से लगभग 7 किलोमीटर अंदर बसे ग्राम पंचायत केरलापेंदा का प्राचीन राम मंदिर अब पुनः भक्ति और श्रद्धा का केंद्र बन गया है
करीब 21 वर्षों तक सूना पड़े इस मंदिर में सामूहिक हवन-पूजन और वैदिक मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई दी। ग्रामीणों के अनुसार नक्सल दबाव के कारण मंदिर में पूजा-अर्चना बंद कर दी गई थी। मंदिर परिसर में न केवल सन्नाटा छा गया था, बल्कि वहाँ नक्सलियों की बैठकों का दौर भी शुरू हो गया था, जिससे ग्रामवासियों के मन में भय का वातावरण बना रहता था
ग्रामीण बताते हैं कि मंदिर का निर्माण वर्ष 1978 में किया गया था। राजस्थान से भगवान श्रीराम, लखनलाल (लक्ष्मण) और माता सीता की प्रतिमाएँ लाकर विधिवत स्थापना की गई थी। प्रतिमाओं की मनोहारी छवि आज भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। जैसे ही कोई भक्त मंदिर में प्रवेश करता है, वातावरण स्वतः ही राममय हो उठता है।
पिछले वर्ष केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के सहयोग से मंदिर के द्वार पुनः खोले गए। इसके बाद से धीरे-धीरे पूजा-पाठ प्रारंभ हुआ और अब 21 वर्षों बाद पहली बार सामूहिक एक कुंडीय यज्ञ का आयोजन किया गया।
इस ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी विशेष रूप से शामिल हुईं। उन्होंने ग्रामवासियों और रामभक्तों के साथ मिलकर यज्ञ में आहुति दी और क्षेत्र में शांति, सद्भाव और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि “आस्था को दबाया जा सकता है, समाप्त नहीं किया जा सकता। आज केरलापेंदा इसका जीवंत उदाहरण है।”
इस धार्मिक अनुष्ठान में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी,रामदेव नाग,हेमला मुक़ा मांझी,भीमा पिडमेल के मांझी,हेमला जोगा ,नुको देवा पेरमा,मड़कम देवा,मुचाकी पोजा पटेल,आयुषी रवा,जगनाथ,सन्तोष पुराणिक आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर, चिंतलनार से लगभग 7 किलोमीटर अंदर बसे ग्राम पंचायत केरलापेंदा का प्राचीन राम मंदिर अब पुनः भक्ति और श्रद्धा का केंद्र बन गया है
करीब 21 वर्षों तक सूना पड़े इस मंदिर में सामूहिक हवन-पूजन और वैदिक मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई दी। ग्रामीणों के अनुसार नक्सल दबाव के कारण मंदिर में पूजा-अर्चना बंद कर दी गई थी। मंदिर परिसर में न केवल सन्नाटा छा गया था, बल्कि वहाँ नक्सलियों की बैठकों का दौर भी शुरू हो गया था, जिससे ग्रामवासियों के मन में भय का वातावरण बना रहता था
ग्रामीण बताते हैं कि मंदिर का निर्माण वर्ष 1978 में किया गया था। राजस्थान से भगवान श्रीराम, लखनलाल (लक्ष्मण) और माता सीता की प्रतिमाएँ लाकर विधिवत स्थापना की गई थी। प्रतिमाओं की मनोहारी छवि आज भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। जैसे ही कोई भक्त मंदिर में प्रवेश करता है, वातावरण स्वतः ही राममय हो उठता है।
पिछले वर्ष केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के सहयोग से मंदिर के द्वार पुनः खोले गए। इसके बाद से धीरे-धीरे पूजा-पाठ प्रारंभ हुआ और अब 21 वर्षों बाद पहली बार सामूहिक एक कुंडीय यज्ञ का आयोजन किया गया।
इस ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी विशेष रूप से शामिल हुईं। उन्होंने ग्रामवासियों और रामभक्तों के साथ मिलकर यज्ञ में आहुति दी और क्षेत्र में शांति, सद्भाव और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि “आस्था को दबाया जा सकता है, समाप्त नहीं किया जा सकता। आज केरलापेंदा इसका जीवंत उदाहरण है।”
इस धार्मिक अनुष्ठान में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी,रामदेव नाग,हेमला मुक़ा मांझी,भीमा पिडमेल के मांझी,हेमला जोगा ,नुको देवा पेरमा,मड़कम देवा,मुचाकी पोजा पटेल,आयुषी रवा,जगनाथ,सन्तोष पुराणिक आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।