शिक्षा

बस्तर की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई उड़ान जगदलपुर आरसेटी में 'पशु सखी' प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

05 Jul 2026 • Admin • 👁 8,241 Views

बस्तर की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई उड़ान जगदलपुर आरसेटी में 'पशु सखी' प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

ग्रामीण महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आज एक बड़ा कदम उठाया गया है,

जगदलपुर, 2 जुलाई 2026/ ग्रामीण महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आज एक बड़ा कदम उठाया गया है, जिसके तहत भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान जगदलपुर द्वारा आयोजित 15 दिवसीय पशु सखी प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया। जिला पंचायत, पशु चिकित्सा विभाग और आरसेटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम बीते 18 जून से लगातार संचालित किया जा रहा था, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशु सखी दीदियों को गुणवत्तापूर्ण और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था ताकि वे पशुपालन के क्षेत्र में बेहतर सेवाएं देकर स्वरोजगार से जुड़ सकें।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम को पूरी कुशलता के साथ संपन्न कराने में पशु चिकित्सा और कौशल विकास से जुड़े विशेषज्ञों ने अपनी अहम भूमिका निभाई। समापन के इस विशेष अवसर पर मुख्य रूप से संस्थान के निदेशक श्री किरण कुमार लुगुन, पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ व प्रशिक्षक श्रीमती शेफाली मेश्राम एवं श्री नन्दकिशोर माझी के साथ-साथ संकाय सदस्य श्रीमती रूमा रॉय और श्री शैलेन्द्र बघेल उपस्थित रहे। इन विशेषज्ञों की देखरेख में प्रशिक्षण के दौरान सभी पशु सखी दीदियों को पशुधन प्रबंधन, स्वास्थ्य देखरेख और पशुपालन से जुड़ी उन्नत तकनीकों के बारे में बारीकी से सिखाया गया।
कार्यक्रम के समापन पर संस्थान के अधिकारियों और प्रशिक्षकों ने सभी प्रशिक्षित पशु सखी दीदियों को उनके उज्ज्वल भविष्य और बेहतर कार्य प्रदर्शन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं। विशेषज्ञों को पूरी उम्मीद है कि यह प्रशिक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में एक मील का पत्थर साबित होगा। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए आरसेटी जगदलपुर के निदेशक श्री किरण कुमार लुगुन ने चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) में आयोजित होने वाले आगामी विभिन्न रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में भी विस्तार से जानकारी साझा की, ताकि क्षेत्र के अधिक से अधिक युवाओं और महिलाओं को हुनरमंद बनाकर स्वावलंबी बनाया जा सके।

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