कृषि

खगपति ने बदला खेती का तरीका पारंपरिक कृषि छोड़ नई तकनीक अपनाकर दोगुनी की अपनी आय

09 Jul 2026 • Admin • 👁 8,017 Views

खगपति ने बदला खेती का तरीका पारंपरिक कृषि छोड़ नई तकनीक अपनाकर दोगुनी की अपनी आय

बस्तर जिले के विकासखण्ड लोहण्डीगुड़ा के अंतर्गत आने वाले ग्राम साडरा में रहने वाले 47 वर्षीय किसान श्री खगपति आज क्षेत्र के अन्य पारंपरिक किसानों के लिए प्रेरणा की एक नई मिसाल बनकर उभरे हैं।

जगदलपुर, 09 जुलाई 2026/ बस्तर जिले के विकासखण्ड लोहण्डीगुड़ा के अंतर्गत आने वाले ग्राम साडरा में रहने वाले 47 वर्षीय किसान श्री खगपति आज क्षेत्र के अन्य पारंपरिक किसानों के लिए प्रेरणा की एक नई मिसाल बनकर उभरे हैं। कुल ढाई हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि के स्वामी खगपति पहले पारंपरिक और पूर्ण रूप से वर्षा आधारित देशी खेती किया करते थे, जिसमें वे केवल धान की फसल लेते थे। इस पुरानी पद्धति के कारण उनकी फसल का उत्पादन बेहद कम होता था और खेती की लागत अधिक आने की वजह से उनकी आय भी काफी सीमित रह जाती थी। इस स्थिति में सुधार तब आया जब उन्होंने कृषि विभाग के मार्गदर्शन और उसकी विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़कर उन्नत और आधुनिक तरीके से खेती करना प्रारंभ किया।

इस बदलाव के तहत विभाग की मदद से उनके खेतों में नलकूप खनन और सोलर पंप की स्थापना कराई गई, जिससे सिंचाई के साधनों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। इसके साथ ही वे एक्सटेन्सन रिफॉर्म्स आत्मा योजना के अंतर्गत आयोजित होने वाले विभिन्न प्रशिक्षणों, भ्रमण कार्यक्रमों और संगोष्ठियों से जुड़े, जहाँ उन्होंने कृषि की नई पद्धतियों और बेहतर प्रबंधन के गुर सीखे। विगत 3 वर्षों से उन्नतशील तरीके से खेती कर रहे खगपति बताते हैं कि नई तकनीकों को अपनाने से उनकी फसल उत्पादकता में भारी वृद्धि हुई है, जिससे उनकी आय का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। जहाँ पहले पारंपरिक तरीके से खेती करने पर उन्हें सालभर में लगभग 80,250 रुपये के आसपास ही आमदनी मिल पाती थी, वहीं अब सिंचाई के साधनों में बढ़ोतरी और उन्नत तकनीकी प्रबंधन की बदौलत यह बढ़कर डेढ़ लाख रूपए से ज्यादा हो गई है। उनका मानना है कि अगर सही तकनीक और शासकीय योजनाओं का सही समय पर लाभ लिया जाए, तो खेती को एक बेहद मुनाफेदार और लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।

अपनी इस बड़ी सफलता के बाद अब खगपति केवल स्वयं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने गाँव के अन्य किसानों को भी फसल विविधीकरण धान के बदले दूसरी फसलें लेने और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रहे हैं। इसी कड़ी में कृषि विभाग के उप संचालक द्वारा भी क्षेत्र के तमाम कृषक बंधुओं से एक विशेष अपील किया है कि कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत जो भी किसान अपने पिछले वर्ष के धान वाले खसरे के बदले इस बार कोई अन्य वैकल्पिक फसल लगाता है, तो उसे शासन की ओर से 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से अतिरिक्त लाभ प्रदान किया जाएगा। इस लाभकारी योजना का लाभ उठाने और अपनी आय में बढ़ोतरी करने के लिए किसान अपने क्षेत्र के मैदानी कृषि अधिकारी या स्थानीय सहकारी समिति लेम्पस में जाकर आसानी से अपना पंजीयन करवा सकते हैं।

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