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|| मेरे पिता निर्दोष हैं तो उन्हें सजा क्यों? असली नक्सली नेताओं को सजा कब मिलेगी?” — लाला राम ने अपने पिता को निर्दोष बताते हुए न्याय की मांग की है ||

📅 06 Sep 2026, 10:56 AM ✍️ Admin 👁 8,714 Views ⏱️ 2 मिनट पठन
|| मेरे पिता निर्दोष हैं तो उन्हें सजा क्यों? असली नक्सली नेताओं को सजा कब मिलेगी?” — लाला राम ने अपने पिता को निर्दोष बताते हुए न्याय की मांग की है ||

(संतोष यादव) जगदलपुर:- झीरम घाटी हत्याकांड मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। अब इन दोषियों को क्या सजा मिलेगी, इसका फैसला 16 सितंबर को सुनाया जाएगा।
अदालत के फैसले के बाद मामले में एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि झीरम हमले के कथित मुख्य साजिशकर्ताओं और मास्टरमाइंड तक जांच क्यों नहीं पहुंच सकी। वहीं, जिन लोगों पर नक्सलियों को रसद, लकड़ी और अन्य सहायता उपलब्ध कराने तथा हमले के दौरान सहयोग करने के आरोप थे, उन्हें अदालत ने दोषी माना है।
झीरम घाटी कांड में राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई गंभीर सवाल लंबे समय से उठते रहे हैं। मामले में 10 दोषियों की सजा पर आने वाला फैसला अब 16 सितंबर को न्यायिक प्रक्रिया के अगले महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखा जा रहा है।झीरम कांड: 10 दोषियों की सजा पर 16 सितंबर को फैसला
एनआईए कोर्ट ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया, मास्टरमाइंड अब भी सवालों के घेरे में बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में एनआईए की विशेष अदालत द्वारा 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद अब उनकी सजा पर 16 सितंबर को फैसला सुनाया जाएगा। मामले में अदालत के निर्णय के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि हमले के कथित मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड तक जांच की पहुंच क्यों नहीं बन सकी।
बताया गया है कि दोषी ठहराए गए आरोपियों पर हमले के दौरान अलग-अलग भूमिकाएं निभाने के आरोप थे। इनमें नक्सलियों के लिए रसद उपलब्ध कराने, खाना बनाने, रास्ता रोकने और अन्य सहयोग देने जैसे आरोप शामिल हैं। हालांकि, अंतिम सजा अदालत द्वारा 16 सितंबर को सुनाए जाने के बाद ही स्पष्ट होगी।
33 मुख्य आरोपियों में कई की मौत
मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान नामजद/चिह्नित कई मुख्य आरोपियों की स्थिति भी बदल चुकी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुछ आरोपी सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए, जबकि कुछ की मृत्यु बीमारी अथवा अन्य कारणों से हो चुकी है। ऐसे में झीरम हमले की पूरी साजिश और उसके कथित मास्टरमाइंड तक पहुंचने का सवाल अभी भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
महेंद्र कर्मा की पत्नी ने कहा—हाईकोर्ट तक जाएंगे
झीरम घाटी हमले में शहीद हुए कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा की पत्नी ने अदालत के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे हाईकोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगी। उनका कहना है कि हमले के पीछे जिन लोगों की बड़ी भूमिका थी, उन्हें भी कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।
झीरम कांड में राजनीतिक नेतृत्व, सुरक्षा व्यवस्था और हमले की साजिश से जुड़े कई सवाल वर्षों से उठते रहे हैं। अब 16 सितंबर को दोषियों की सजा पर आने वाला फैसला इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।इसे समाचार में आरोप/दावे के रूप में सावधानी से इस तरह लिखा जा सकता है:झीरम घाटी में आदिवासियों को सजा, असली साजिशकर्ताओं पर कार्रवाई कब?झीरम घाटी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर आदिवासियों को न्याय दिलाने की मांग उठ रही है। आरोप है कि झीरम घाटी क्षेत्र में खेती-किसानी कर जीवन यापन करने वाले कुछ आदिवासियों को मामले में दोषी ठहराकर सजा दी गई, जबकि हमले की कथित बड़ी साजिश रचने और नक्सली नेतृत्व करने वालों तक जांच और कार्रवाई नहीं पहुंच सकी।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि आदिवासियों को कथित रूप से बरगलाकर या दबाव में लेकर हथियार उठाने और हिंसक घटनाओं में शामिल कराया गया, जबकि हमले के पीछे वास्तविक रणनीतिक भूमिका निभाने वाले नक्सली नेताओं के विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

इसी आधार पर अब सवाल उठाया जा रहा है कि यदि निर्दोष या छोटे स्तर पर सहयोग के आरोप में पकड़े गए आदिवासियों को सजा मिल सकती है, तो हमले की साजिश और नेतृत्व करने वाले कथित प्रमुख नक्सली कमांडरों तक कानून का हाथ क्यों नहीं पहुंचा?

पीड़ित परिवारों और आदिवासी समाज की मांग है कि झीरम घाटी मामले की पूरी सच्चाई सामने लाई जाए, दोषियों की भूमिका के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई हो और किसी निर्दोष व्यक्ति को केवल संदेह या दबाव के आधार पर सजा न मिले।

हालांकि, किसी व्यक्ति या संस्था को सरकार का संरक्षण प्राप्त होने का दावा तभी तथ्य के रूप में प्रकाशित किया जाना चाहिए, जब उसके समर्थन में न्यायालयीन आदेश, आधिकारिक दस्तावेज या विश्वसनीय जांच रिपोर्ट ओर लाला राम ने अपने पिता को निर्दोष बताते हुए न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि उनके पिता सहित निर्दोष आदिवासियों को नक्सली गतिविधियों से जोड़कर जेल में बंद किया गया, जबकि वास्तविक नक्सली नेतृत्व और घटना के मुख्य जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई का सवाल अब भी बना हुआ हैलाला राम ने सवाल उठाया कि यदि उनके पिता निर्दोष हैं तो उन्हें सजा क्यों भुगतनी पड़े और झीरम घाटी हत्याकांड के वास्तविक मास्टरमाइंड तथा नक्सली नेतृत्व को सजा कब मिलेगी?

गौरतलब है कि जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत ने झीरम घाटी हमले के मामले में ट्रायल का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। अदालत 16 सितंबर 2026 को सजा की अवधि तय करेगी।

लाला राम ने सरकार और न्यायपालिका से मामले की निष्पक्ष समीक्षा कर निर्दोष आदिवासियों को न्याय दिलाने तथा वास्तविक दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

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