एक साल भी नहीं टिकी सड़क! ठेकेदार-अधिकारी-नेताओं की मिलीभगत से विकास या भ्रष्टाचार?
📅 09 Sep 2026, 10:34 AM
✍️ Admin
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संतोष यादव
दंतेवाड़ा। जिले के ग्राम पंचायत भांसी से मासापारा तक लंबे इंतजार के बाद आखिरकार सड़क निर्माण पूरा हुआ। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब वर्षों की परेशानी खत्म होगी और आवागमन सुगम होगा। लेकिन सड़क निर्माण को अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ और जगह-जगह सड़क उखड़ने लगी है।
सड़क की हालत देखकर अब ग्रामीणों के बीच निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आखिर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सड़क इतनी जल्दी खराब कैसे होने लगी? क्या निर्माण के दौरान निर्धारित मापदंडों का पालन हुआ? क्या संबंधित विभाग के अधिकारियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की थी?
ग्रामीणों का सवाल है कि ठेकेदार काम करता है, अधिकारी निरीक्षण करते हैं और नेता विकास का दावा करते हैं—फिर सड़क एक साल भी क्यों नहीं टिक पाई?
यदि सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता हुआ है तो इसकी तकनीकी जांच कराकर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर सड़क की स्थिति की जांच करे और दोष पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
अब सवाल सिर्फ सड़क उखड़ने का नहीं, बल्कि सरकारी धन और ग्रामीणों के भरोसे का है—आखिर विकास के नाम पर बनी सड़क इतनी जल्दी क्यों उखड़ गई?
सड़क की हालत देखकर अब ग्रामीणों के बीच निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आखिर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सड़क इतनी जल्दी खराब कैसे होने लगी? क्या निर्माण के दौरान निर्धारित मापदंडों का पालन हुआ? क्या संबंधित विभाग के अधिकारियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की थी?
ग्रामीणों का सवाल है कि ठेकेदार काम करता है, अधिकारी निरीक्षण करते हैं और नेता विकास का दावा करते हैं—फिर सड़क एक साल भी क्यों नहीं टिक पाई?
यदि सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता हुआ है तो इसकी तकनीकी जांच कराकर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर सड़क की स्थिति की जांच करे और दोष पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
अब सवाल सिर्फ सड़क उखड़ने का नहीं, बल्कि सरकारी धन और ग्रामीणों के भरोसे का है—आखिर विकास के नाम पर बनी सड़क इतनी जल्दी क्यों उखड़ गई?