झीरम घाटी मामले में सोनी सोरी और लक्ष्मी मड़कम ने उठाए सवाल मृत्युदंड पाए आदिवासियों को बताया निर्दोष, कहा—पूरी साजिश और अन्य आरोपियों की भूमिका भी सामने आए
📅 24 Sep 2026, 02:22 AM
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संतोष यादव
जगदलपुर। झीरम घाटी मामले में 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद समाज सेविका सोनी सोरी और जेल में बंद एक आदिवासी आरोपी की मां लक्ष्मी मड़कम ने सरकार, जांच एजेंसी और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। दोनों ने दावा किया कि जिन आदिवासियों को सजा मिली है, उनकी व्यक्तिगत भूमिका और उनके खिलाफ मौजूद साक्ष्यों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।
सोनी सोरी और लक्ष्मी मड़कम का आरोप है कि झीरम घाटी हमले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका अब भी पूरी तरह सामने नहीं आई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मामले में अन्य आरोपी फरार हैं अथवा उनके संबंध में जांच लंबित है, तो केवल 10 लोगों को सजा मिलना झीरम की पूरी साजिश के सामने आने के समान कैसे माना जा सकता है।
गौरतलब है कि 25 मई 2013 को झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर माओवादी हमला हुआ था। मामले में 5 सितंबर 2026 को विशेष NIA अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया और 16 सितंबर को सभी 10 को मृत्युदंड सुनाया।
अदालत के फैसले को लेकर सवाल
सोनी सोरी और लक्ष्मी मड़कम ने सवाल उठाया कि क्या मृत्युदंड पाए प्रत्येक अभियुक्त की व्यक्तिगत भूमिका अदालत के निर्णय में अलग-अलग स्पष्ट रूप से स्थापित की गई है। उनका कहना है कि प्रत्येक आरोपी के खिलाफ निर्णायक साक्ष्य, गवाहों की गवाही, दस्तावेजी साक्ष्य, फॉरेंसिक अथवा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की कड़ी को सार्वजनिक चर्चा के स्तर पर स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि अभियोजन का मामला आपराधिक षड्यंत्र या सामूहिक उद्देश्य पर आधारित है, तो प्रत्येक अभियुक्त की व्यक्तिगत भागीदारी किस साक्ष्य से स्थापित हुई। साथ ही मृत्युदंड देने के दौरान प्रत्येक आरोपी के मामले में अलग-अलग परिस्थितियों पर विचार किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
NIA से भी मांगा जवाब
दोनों ने NIA से झीरम मामले की जांच की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका सवाल है कि मामले में जिन आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई अथवा जांच बाकी बताई जाती है, उनकी वर्तमान स्थिति क्या है और पूरी साजिश तथा कथित कमांड स्ट्रक्चर की जांच किस स्तर तक पहुंची है।
NIA की आधिकारिक वेबसाइट पर 16 सितंबर 2026 को जगदलपुर की विशेष अदालत द्वारा 10 CPI (माओवादी) कैडरों को मृत्युदंड दिए जाने संबंधी प्रेस विज्ञप्ति दर्ज है।
सरकार से पारदर्शिता की मांग
सोनी सोरी और लक्ष्मी मड़कम ने सरकार से पूछा है कि क्या 10 लोगों को मृत्युदंड मिलने के साथ झीरम मामले की पूरी जांच समाप्त हो गई है या अन्य आरोपियों और व्यापक साजिश से जुड़े पहलुओं पर जांच आगे भी जारी है। उन्होंने पीड़ित परिवारों को मामले की जांच, लंबित कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि उनका सवाल किसी दोषी को बचाने का नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका, उपलब्ध साक्ष्य और पूरी न्यायिक प्रक्रिया को स्पष्ट करने का है।
उनका कहना है कि झीरम घाटी के पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन न्याय के साथ पूरी सच्चाई, निष्पक्ष जांच और पारदर्शी प्रक्रिया भी सामने आनी चाहिए।
सोनी सोरी और लक्ष्मी मड़कम का आरोप है कि झीरम घाटी हमले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका अब भी पूरी तरह सामने नहीं आई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मामले में अन्य आरोपी फरार हैं अथवा उनके संबंध में जांच लंबित है, तो केवल 10 लोगों को सजा मिलना झीरम की पूरी साजिश के सामने आने के समान कैसे माना जा सकता है।
गौरतलब है कि 25 मई 2013 को झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर माओवादी हमला हुआ था। मामले में 5 सितंबर 2026 को विशेष NIA अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया और 16 सितंबर को सभी 10 को मृत्युदंड सुनाया।
अदालत के फैसले को लेकर सवाल
सोनी सोरी और लक्ष्मी मड़कम ने सवाल उठाया कि क्या मृत्युदंड पाए प्रत्येक अभियुक्त की व्यक्तिगत भूमिका अदालत के निर्णय में अलग-अलग स्पष्ट रूप से स्थापित की गई है। उनका कहना है कि प्रत्येक आरोपी के खिलाफ निर्णायक साक्ष्य, गवाहों की गवाही, दस्तावेजी साक्ष्य, फॉरेंसिक अथवा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की कड़ी को सार्वजनिक चर्चा के स्तर पर स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि अभियोजन का मामला आपराधिक षड्यंत्र या सामूहिक उद्देश्य पर आधारित है, तो प्रत्येक अभियुक्त की व्यक्तिगत भागीदारी किस साक्ष्य से स्थापित हुई। साथ ही मृत्युदंड देने के दौरान प्रत्येक आरोपी के मामले में अलग-अलग परिस्थितियों पर विचार किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
NIA से भी मांगा जवाब
दोनों ने NIA से झीरम मामले की जांच की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका सवाल है कि मामले में जिन आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई अथवा जांच बाकी बताई जाती है, उनकी वर्तमान स्थिति क्या है और पूरी साजिश तथा कथित कमांड स्ट्रक्चर की जांच किस स्तर तक पहुंची है।
NIA की आधिकारिक वेबसाइट पर 16 सितंबर 2026 को जगदलपुर की विशेष अदालत द्वारा 10 CPI (माओवादी) कैडरों को मृत्युदंड दिए जाने संबंधी प्रेस विज्ञप्ति दर्ज है।
सरकार से पारदर्शिता की मांग
सोनी सोरी और लक्ष्मी मड़कम ने सरकार से पूछा है कि क्या 10 लोगों को मृत्युदंड मिलने के साथ झीरम मामले की पूरी जांच समाप्त हो गई है या अन्य आरोपियों और व्यापक साजिश से जुड़े पहलुओं पर जांच आगे भी जारी है। उन्होंने पीड़ित परिवारों को मामले की जांच, लंबित कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि उनका सवाल किसी दोषी को बचाने का नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका, उपलब्ध साक्ष्य और पूरी न्यायिक प्रक्रिया को स्पष्ट करने का है।
उनका कहना है कि झीरम घाटी के पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन न्याय के साथ पूरी सच्चाई, निष्पक्ष जांच और पारदर्शी प्रक्रिया भी सामने आनी चाहिए।